हेल्लो दोस्तो मेरा नाम कपिल कश्यप है आज मै फिर आपके लिए एक बहुत ही मजेदार आर्टिकल लिख रहा हूं और मुझे आपके साथ ये जानकारी साझा करते हुए बहुत खुशी हो रही है। देश में कोरोना महामारी के दौरान बहुत से व्यक्ति इंटरनेट पर वर्क फ्रॉम होम सर्च करते है। बहुत सी ऐसी वेबसाइट्स खुल जाती है जो ऑनलाइन काम देती है इनमें से कुछ कंपनी सही होती है। जो वास्तव मै काम देती है और बदले मै पैसे देती है पर कुछ वर्क फ्रॉम होम के नाम पर ठगी करते है। जैसे ही आप उन वेबसाइट्स पर रजिस्ट्रेशन करते है। आपका आईपी एड्रेस उनके पास चला जाता है और फिर वे आपने कंप्यूटर मोबाइल या लैपटॉप से पर्सनल डाटा चोरी कर लेते है। तो दोस्तो ऐसी कंपनी व ऐसे लोगो से सावधान होने की जरूरत है। रजिस्टर करते समय उचित सावधानी बरते कंपनी के बारे मै पूरी जानकारी ले। रिव्यू चेक करे तभी रजिस्टर करे।
वर्क फ्रॉम होम में कंपनियां रख रही नजर, लालच देकर लिया जा रहा लॉयल्टी टेस्ट
देश में कोरोना महामारी के दौरान घर से काम करने वाले कर्मचारियों पर पर्सनल डाटा को लेकर भी सावधान रहने की जरूरत: दुग्गल
साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने भी माना कि नए माहौल में इन तरीकों के कामकाज पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने ये आशंका भी जताई है के वर्क फ्रॉम होम के समय कर्मचारियों को अपने पर्सनल डाटा को लेकर भी सावधान रहने की जरूरत है। दुग्गल के मुताबिक साइबर ठग बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को शिकार बना रहे हैं। देश में व्यापक आईटी कानून न होने की वजह से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार इस आपदा में अवसर देखते हुए देश में प्रभावी आईटी कानून बनाए। रखने के लिए कंपनियों ने नई तरकीबें अपनानी शुरू कर दी हैं। न सिर्फ कर्मचारियों के लैपटॉप और दूसरे डिवाइस पर नजर रखने से जुड़े सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर रखे हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनका लॉयल्टी
टेस्ट भी किया जा रहा है।
आई पी एड्रेस से करते है हैक
‘हिन्दुस्तान’ को मिली जानकारी के मुताबिक, लॉयल्टी टेस्ट के लिए बकायदा आईटी कंसल्टेंसी कंपनियों की मदद ली जा रही है। बीपीओ और केपीओ क्षेत्र में इसका चलन ज्यादा है। मामले से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, कर्मचारियों के पास कंपनी और क्लाइंट दोनों का संवेदनशील डाटा रहता है। दफ्तरों में काम करने वाले कम्प्यूटर में ऐसी व्यवस्था रहती है कि पेनड्राइव जैसी चीजें न लग सकें, लेकिन घर से ही काम होने से लोग खुद का लैपटॉप भी इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में बढ़ते खतरे को देखते हुए कंपनियों ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए समय-समय पर संदिग्ध कर्मचारी का लॉयल्टी टेस्ट लेना भी शुरू कर दिया है। संदिग्ध कर्मचारियों को नई नौकरी और प्रमोशन से जुड़े ऑफर दिए जाते हैं। कर्मचारी जब ऐसे ऑफर स्वीकर कर लेते हैं तो उन्हें दफ्तर का सीक्रेट डाटा लाने को कहा जाता है। उसके बदले में बोनस का लालच दिया जाता है। जैसे ही वो कंपनी का डाटा कॉपी करने लगता है, सिस्टम में अलर्ट आता है और उसकी हरकत पकड़ी जाती है।
यूआरएल हिस्ट्री पर भी लगातार निगाह
जॉब कंसल्टेंसी फर्म ग्लोबल हंट के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल के मुतााबिक वर्क फ्रॉम होम के चलते कंपनियों ने कर्मचारियों के कम्प्यूटर या लैपटॉप में ऐसे कई बग या सॉफ्टवेयर लगा दिए हैं, जिनके जरिए न सिर्फ उनके काम के घंटे, काम की जगह बल्कि समय-समय पर स्क्रीनशॉट भी सीधे हेडऑफिस को मिलते रहते हैं। यही नहीं संवेदनशील डेटा एक्सेस करने पर अलर्ट के साथ यूआरएल हिस्ट्री पर भी लगातार निगाह रखी जाती है।
ट्रैकिंग तकनीक में कंपनियां 37 फीसदी रकम खर्च कर रहीं
इसी महीने उद्योग संगठन सीआईआई और एचआर फर्म टैलेंटॉनिक के भी साझा सर्वे में बताया गया था कि कर्मचारियों की ट्रैकिंग जैसी तकनीक में कंपनियां 37 फीसदी रकम खर्च कर रही हैं। पर्सनल डाटा को लेकर भी सावधान रहने की जरूरत: दुग्गल
साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने भी माना कि नए माहौल में इन तरीकों के कामकाज पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने ये आशंका भी जताई है के वर्क फ्रॉम होम के समय कर्मचारियों को अपने पर्सनल डाटा को लेकर भी सावधान रहने की जरूरत है। दुग्गल के मुताबिक साइबर ठग बड़े पैमाने पर वर्क फ्रॉम होम कर रहे लोगों को शिकार बना रहे हैं। देश में व्यापक आईटी कानून न होने की वजह से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार इस आपदा में अवसर देखते हुए देश में प्रभावी आईटी कानून बनाए।


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